कुरुक्षेत्र पत्रिका नोट्स: India's Startup Revolution

India's Startup Revolution : भारत की स्टार्टअप क्रांति


भारत ने खुद को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में मजबूती से स्थापित कर लिया है, जिसमें अब 1.57 लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त उद्यम शामिल हैं। इन स्रोतों के अनुसार, स्टार्टअप इंडिया जैसी प्रमुख पहलों और विभिन्न फंडिंग योजनाओं ने न केवल नवाचार को बढ़ावा दिया है, बल्कि 17 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां भी पैदा की हैं। इस विकास में छोटे शहरों (टियर II और III) की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है, जहाँ से अब आधे से अधिक नए स्टार्टअप उभर रहे हैं। सरकार कर लाभ, क्रेडिट गारंटी और इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से उद्यमियों को निरंतर समर्थन प्रदान कर रही है, जिससे व्यावसायिक सुगमता बढ़ी है। विशेष रूप से, महिला उद्यमिता में भी वृद्धि देखी गई है, जिसमें हजारों स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिला निदेशकों द्वारा किया जा रहा है। कुल मिलाकर, ये दस्तावेज़ भारत की आर्थिक प्रगति और तकनीकी उन्नति में स्टार्टअप क्षेत्र की परिवर्तनकारी भूमिका को दर्शाते हैं।

स्टार्टअप क्रांति (Startup Revolution) पर विस्तृत नोट्स निम्नलिखित हैं:


1. भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वर्तमान स्थिति

  • वैश्विक स्थान: भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में मजबूती से स्थापित हो चुका है।
  • स्टार्टअप्स की संख्या: 31 दिसंबर, 2024 तक DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 1,57,706 हो गई है, जबकि 2016 में यह केवल 502 थी।
  • यूनिकॉर्न: देश में 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जो नवाचार और नए अवसरों को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • क्षेत्रीय विस्तार: बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ, अब 51% से अधिक स्टार्टअप टियर II/III शहरों से उभर रहे हैं।

2. रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव

  • कुल रोजगार: स्टार्टअप्स ने अब तक 17.28 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन किया है।
  • प्रमुख क्षेत्र: रोजगार के मामले में आईटी सर्विसेज (2.10 लाख नौकरियां) सबसे आगे है, इसके बाद हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंसेज (1.51 लाख) और प्रोफेशनल व कमर्शियल सर्विसेज (96,474) का स्थान है।
  • महिला उद्यमिता: भारत में महिला उद्यमियों की संख्या बढ़ रही है; लगभग 75,935 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।

3. प्रमुख सरकारी योजनाएं और पहल

  • स्टार्टअप इंडिया (Startup India): 16 जनवरी, 2016 को शुरू की गई यह प्रमुख पहल नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास के लिए एक संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित है। इसमें स्टार्टअप्स के लिए सरलीकृत अनुपालन और तीन साल के लिए आयकर में छूट जैसे लाभ शामिल हैं।
  • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS): 2021 में ₹945 करोड़ के कोष के साथ शुरू की गई यह योजना स्टार्टअप्स को उनके शुरुआती चरणों (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप विकास, आदि) में सहायता करती है। दिसंबर 2024 तक इसके तहत 213 इन्क्यूबेटरों को मंजूरी दी गई है।
  • स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS): जून 2016 में ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ शुरू की गई इस योजना का प्रबंधन SIDBI द्वारा किया जाता है। इसने 1,173 स्टार्टअप्स में ₹21,276 करोड़ के निवेश को उत्प्रेरित किया है।
  • क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): यह योजना बैंकों और NBFCs से स्टार्टअप्स को मिलने वाले ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। जनवरी 2025 तक, इसमें 209 स्टार्टअप्स के लिए ₹604.16 करोड़ के 260 ऋणों की गारंटी दी गई है।

4. नवाचार और भविष्य की रूपरेखा

  • अटल इनोवेशन मिशन (AIM): NITI आयोग द्वारा शुरू किए गए इस मिशन के तहत स्कूलों में 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं और 72 अटल इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से 3,556 स्टार्टअप्स को पोषित किया गया है।
  • MeitY स्टार्टअप हब (MSH): यह मंत्रालय (Electronics and IT) के तहत एक केंद्रीय हब के रूप में कार्य करता है, जिसमें 30,000+ टेक स्टार्टअप्स, 495+ इन्क्यूबेटर्स और 328+ लैब शामिल हैं।
  • निष्कर्ष: पिछले 10 वर्षों में सरकार और विभिन्न हितधारकों के बीच गतिशील सहयोग ने भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है, जिससे आने वाले समय में और भी बड़े मील के पत्थर हासिल होने की उम्मीद है।

भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के वर्तमान विकास की समीक्षा
 भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Startup Ecosystem) के वर्तमान विकास की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि देश पिछले एक दशक में एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में उभरा है। स्रोतों के आधार पर इस विकास के प्रमुख पहलुओं का विवरण नीचे दिया गया है:

1. असाधारण संख्यात्मक और वैश्विक विकास भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में मजबूती से स्थापित हो चुका है। दिसंबर 2024 तक, DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 1,57,706 हो गई है, जो 2016 में मात्र 502 थी। इसके अतिरिक्त, भारत में अब 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जो देश के उद्यमशीलता परिदृश्य को फिर से परिभाषित कर रहे हैं।

2. नवाचार का लोकतंत्रीकरण (Geographical Expansion) विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका क्षेत्रीय विस्तार है। जहाँ बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे बड़े शहर अग्रणी रहे हैं, वहीं अब 51% से अधिक स्टार्टअप टियर II और टियर III शहरों से उभर रहे हैं। यह दर्शाता है कि नवाचार और उद्यमिता अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे शहरों तक पहुँच चुकी है।

3. आर्थिक प्रभाव और रोजगार सृजन स्टार्टअप्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन के मामले में क्रांति ला दी है:

  • अब तक 17.28 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन किया गया है।
  • आईटी सर्विसेज (2.10 लाख नौकरियां) रोजगार देने में सबसे आगे है, इसके बाद हेल्थकेयर (1.51 लाख) और प्रोफेशनल सर्विसेज का स्थान आता है।
  • महिला उद्यमिता में भी वृद्धि देखी गई है, जहाँ 75,935 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।

4. मजबूत सरकारी समर्थन और वित्तीय ढांचा स्रोतों के अनुसार, सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है:

  • वित्तीय सहायता: 'फंड ऑफ फंड्स' (FFS) ने 1,173 स्टार्टअप्स में ₹21,276 करोड़ के निवेश को प्रेरित किया है। 'सीड फंड योजना' (SISFS) के तहत 213 इन्क्यूबेटरों को स्टार्टअप्स के शुरुआती चरणों में मदद के लिए मंजूरी दी गई है।
  • क्रेडिट गारंटी: CGSS योजना के माध्यम से जनवरी 2025 तक ₹604.16 करोड़ के ऋणों की गारंटी दी गई है, जिससे स्टार्टअप्स के लिए पूंजी तक पहुंच आसान हुई है।
  • संस्थागत ढांचा: 'अटल इनोवेशन मिशन' के तहत स्कूलों में 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स बनाई गई हैं, जबकि 'MeitY स्टार्टअप हब' 30,000 से अधिक टेक स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।

5. भविष्य की संभावनाएं पिछले 10 वर्षों में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच गतिशील सहयोग ने एक ऐसा परिवेश बनाया है जो न केवल मौजूदा स्टार्टअप्स को सफल होने में मदद कर रहा है, बल्कि नवाचार की अगली पीढ़ी को भी सशक्त बना रहा है। भारत का स्टार्टअप परिदृश्य आने वाले वर्षों में और भी अधिक मील के पत्थर हासिल करने की ओर अग्रसर है।

भारत में स्टार्टअप्स के विकास हेतु सरकारी वित्तीय योजनाओं का विश्लेषण 

भारत में स्टार्टअप्स के विकास के लिए सरकार ने एक व्यापक वित्तीय ढांचा तैयार किया है, जिसका उद्देश्य नवाचार को शुरुआती विचार से लेकर व्यावसायिक स्तर तक पहुँचाने में मदद करना है। स्रोतों के आधार पर, प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं का विश्लेषण निम्नलिखित है:

1. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS)

यह योजना स्टार्टअप्स के विकास के सबसे नाजुक चरण, यानी शुरुआती पूंजी (Seed Funding) की आवश्यकता को पूरा करती है।

  • उद्देश्य: यह स्टार्टअप्स को 'प्रूफ ऑफ कांसेप्ट', प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण और बाजार में प्रवेश (Market Entry) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • प्रभाव: वर्ष 2021 में ₹945 करोड़ के कोष के साथ शुरू हुई इस योजना के तहत दिसंबर 2024 तक 2,622 स्टार्टअप्स को ₹467.75 करोड़ की फंडिंग से लाभान्वित किया गया है। इसके संचालन के लिए 213 इन्क्यूबेटरों को भी मंजूरी दी गई है।

2. स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS)

यह योजना सीधे निवेश करने के बजाय एक 'उत्प्रेरक' (Catalyst) के रूप में कार्य करती है ताकि घरेलू पूंजी के प्रवाह को बढ़ाया जा सके।

  • संरचना: जून 2016 में ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ शुरू हुई इस योजना का प्रबंधन SIDBI द्वारा किया जाता है। यह योजना SEBI-पंजीकृत अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में निवेश करती है, जो बदले में स्टार्टअप्स में इक्विटी निवेश करते हैं।
  • उपलब्धि: दिसंबर 2024 तक, इस योजना ने 1,173 स्टार्टअप्स में ₹21,276 करोड़ के निवेश को उत्प्रेरित किया है, जो दर्शाता है कि सरकारी समर्थन ने निजी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने में मदद की है।

3. स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS)

वित्तीय सहायता का एक अन्य स्तंभ ऋण उपलब्धता है, जहाँ स्टार्टअप्स को बिना किसी कठिन कोलेटरल के पूंजी मिल सके।

  • कार्यप्रणाली: यह योजना बैंकों, NBFCs और वेंचर डेट फंड्स द्वारा दिए गए ऋणों के लिए क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। इसे नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
  • प्रगति: जनवरी 2025 तक, इस योजना ने 209 स्टार्टअप्स के लिए ₹604.16 करोड़ मूल्य के 260 ऋणों की गारंटी दी है। विशेष रूप से, महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए इसमें से ₹27.04 करोड़ 17 महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को आवंटित किए गए हैं।

4. कर लाभ और अनुपालन में छूट

पूंजी के सीधे निवेश के अलावा, स्टार्टअप इंडिया पहल के माध्यम से स्टार्टअप्स के लिए नकदी प्रवाह (Cash Flow) को बनाए रखने हेतु वित्तीय राहत दी जाती है।

  • आयकर छूट: मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को उनके संचालन के शुरुआती तीन वर्षों के लिए आयकर से छूट दी गई है।
  • सरलीकृत अनुपालन: स्व-प्रमाणन (Self-certification) और सरलीकृत नियमों के कारण स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन लागत में कमी आई है, जिससे वे अपनी सीमित वित्तीय संपदा का उपयोग नवाचार में कर सकते हैं।

5. अन्य नवाचार-केंद्रित वित्तीय सहायता

  • अटल इनोवेशन मिशन (AIM): इसके तहत 72 अटल इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से 3,556 स्टार्टअप्स को पोषित किया गया है, जिससे 41,965 नौकरियों का सृजन हुआ है।
  • MeitY स्टार्टअप हब (MSH): यह विशेष रूप से टेक स्टार्टअप्स के लिए संसाधनों और उत्कृष्टता केंद्रों (COEs) के बीच तालमेल सुनिश्चित कर वित्तीय और तकनीकी सहायता की पहुंच को सुगम बनाता है।

निष्कर्ष: सरकारी वित्तीय योजनाओं ने केवल अनुदान देने के बजाय एक ऐसा बहुआयामी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है, जो शुरुआती अनुदान (Seed), बड़े पैमाने पर इक्विटी निवेश (FFS) और ऋण सुविधा (CGSS) तीनों मोर्चों पर स्टार्टअप्स को सशक्त बनाता है।

भारत की स्टार्टअप क्रांति का संक्षिप्त सारांश

भारत की स्टार्टअप क्रांति का संक्षिप्त सारांश निम्नलिखित है:

भारत वर्तमान में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में मजबूती से स्थापित है। 31 दिसंबर, 2024 तक देश में 1.57 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। इस क्रांति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब 51% स्टार्टअप टियर II और टियर III शहरों से उभर रहे हैं, जो नवाचार के विकेंद्रीकरण को दर्शाता है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:

  • रोजगार सृजन: स्टार्टअप्स ने अब तक 17.28 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन किया है, जिसमें आईटी सर्विसेज (2.10 लाख) और हेल्थकेयर (1.51 लाख) अग्रणी क्षेत्र हैं।
  • महिला उद्यमिता: महिला भागीदारी में वृद्धि हुई है, जहाँ 75,935 स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक शामिल है।

प्रमुख सरकारी सहायता और योजनाएं:

  • वित्तीय सहायता: सरकार ने ₹10,000 करोड़ का 'फंड ऑफ फंड्स' (FFS) और ₹945 करोड़ की 'सीड फंड योजना' (SISFS) शुरू की है ताकि स्टार्टअप्स को शुरुआती चरणों में पूंजी मिल सके। इसके अलावा, क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS) के तहत जनवरी 2025 तक 209 स्टार्टअप्स के लिए ₹604.16 करोड़ के ऋणों की गारंटी दी गई है।
  • नवाचार और बुनियादी ढांचा: 'अटल इनोवेशन मिशन' के तहत स्कूलों में 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं। साथ ही, MeitY स्टार्टअप हब (MSH) 30,000 से अधिक टेक स्टार्टअप्स और सैकड़ों इन्क्यूबेटरों को जोड़कर एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है।

निष्कर्षतः, पिछले 10 वर्षों में सरकार की नीतियों और उद्यमियों के प्रयासों ने मिलकर भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र बना दिया है, जिससे भविष्य में और अधिक आर्थिक विकास की उम्मीद है।



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